शेयर बाजार संकेतक क्या है?

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Solution : जापान में स्थित निक्की, टोक्यो स्टॉक एक्सचेंज (टी.एस.ई.) के लिए एक स्टॉक मार्केट सूचकांक है। निक्की जापानी शेयर के लिए औसतन सबसे अधिक संदर्भित किया जाता है। वर्ष 1950 से ही इसकी निहोन केइजई शिम्बुन (Nikkel) समाचार पत्र द्वारा शेयर बाजार संकेतक क्या है? प्रतिदिन गणना की जाती है। इसे प्रायः निक्की, निक्की सूचकांक या निक्की स्टॉक एवेरेज के नाम से जाना जाता है, अपनी सूचीबद्ध कंपनियों के कुल बाजार पूँजीकरण के आधार पर यह एशिया का सबसे बड़ा व दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा एवं दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है।

Investment Tips : क्‍या होता है इंडेक्‍स फंड जो गिरते बाजार में भी देता है कमाई का मौका, कैसे लगाएं इसमें पैसा

शेयर बाजार अभी अपने पीक से करीब 8,000 अंक नीचे ट्रेडिंग कर रहा है.

शेयर बाजार अभी अपने पीक से करीब 8,000 अंक नीचे ट्रेडिंग कर रहा है.

शेयर बाजार में अभी गिरावट का माहौल है और निवेशकों को यह समझ नहीं आ रहा कि कौन सा स्‍टॉक चुना जाए तो आगे चलकर मुनाफा कर . अधिक पढ़ें

  • News18Hindi
  • Last Updated : May 20, 2022, 07:40 IST

नई दिल्‍ली. शेयर बाजार अभी उतार-चढ़ाव के बीच जूझ रहा है और निवेशक भी अपना पैसा डूबने के डर से बाजार से लगातार बाहर निकाल रहे हैं. एक्‍सपर्ट की मानें तो ऐसे समय में निवेशकों को थोड़ा संयम बरतना चाहिए और बाजार से रिटर्न पाने के अन्‍य विकल्‍पों को आजमाना चाहिए.

गिरावट के इस माहौल में जो निवेशक इक्विटी में पैसे लगाने से हिचक रहे हों, उनके लिए इंडेक्स फंड सुरक्षा के साथ बड़े रिटर्न का मौका बन सकता है. इसमें कैसे और कितना निवेश करना चाहिए, इसको लेकर एक्‍सपर्ट से सलाह ली जा सकती है. इंडेक्‍स फंड वास्‍तव में पूरे ही एक्‍सचेंज से जुड़ा होता है, जिसमें कई कंपनियों के स्‍टॉक शामिल होते हैं. ऐसे में अगर कोई एक स्‍टॉक नुकसान करा रहा है तो दूसरा उसकी भरपाई कर देता है.

शेयर नहीं, सूचकांक से तय होता रिटर्न
बीपीएन फिनकैप कंसल्‍टेंट के सीईओ एके निगम का कहना है कि म्यूचुअल फंड के इंडेक्स फंडों का प्रदर्शन किसी कंपनी विशेष के शेयरों पर नहीं, बल्कि पूरे सूचकांक पर निर्भर करता है. मसलन, निफ्टी-50 या सेंसेक्स-30 का जैसा प्रदर्शन होगा, उसी आधार पर फंड के निवेश से रिटर्न मिलेगा. किसी इंडेक्स में सभी कंपनियों का जितना वेटेज या हिस्सेदारी होती है, उसी अनुपात में उनके शेयर खरीदे जाते हैं. इससे रिटर्न का जोखिम किसी एक कंपनी के प्रदर्शन पर निर्भर नहीं रह जाता.

निवेश का खर्चा और पैसे डूबने का खतरा कम
इंडेक्स फंड पैसिव तरीके से मैनेज किए जाते हैं, इसलिए सक्रिय रूप से मैनेज किए जाने वाले फंडों के मुकाबले इन पर कम खर्च आता है. इससे इन फंडों का कुल खर्च अनुपात बहुत कम हो जाता है. सक्रिय रूप से मैनेज किए जाने वाले फंड निवेशकों से 1 से 2 फीसदी तक शुल्क ले सकते हैं, जो लंबी अवधि के लिहाज से काफी ज्यादा हो जाएगा और आपके कुल रिटर्न पर असर डालेगा. इंडेक्स फंड निवेशकों का पोर्टफोलियो काफी डाइवर्सिफाई कर देते हैं, जिससे पैसा डूबने का खतरा कम हो जाता है.

बाजार में तीन प्रमुख इंडेक्स फंड
सेंसेक्स इंडेक्स फंड : ये बीएसई सेंसेक्स को बेंचमार्क इंडेक्स के रूप में ट्रैक करते हैं और उसकी 30 कंपनियों में निवेश करते हैं, जो ईटीएफ समर्थित होती हैं.
निफ्टी इंडेक्स फंड : ये एनएससी निफ्टी को बेंचमार्क इंडेक्स के रूप में ट्रैक करते हैं और उसकी 50 कंपनियों में निवेश करते हैं.
निफ्टी जूनियर इंडेक्स फंड : ये एनएससी निफ्टी की छोटी कंपनियों में निवेश करते हैं.

थोड़ा पैसा डालना ही समझदारी
शेयर बाजार के जानकार कुंज बंसल का कहना है कि ग्‍लोबल लेवल पर कई फैक्‍टर बाजार पर दबाव बना रहे हैं. यही कारण है कि पिछले कुछ समय से बाजार में गिरावट दिख रही है. अभी अनिश्चितता का माहौल खत्‍म नहीं हुआ है और आगे भी नुकसान उठाना पड़ सकता है. ऐसे में निवेशकों को ज्‍यादा पैसा लगाने के बजाए पोर्टफोलियो का कुछ हिस्‍सा यहां निवेश करना चाहिए. एक संभावना ये भी है कि आने वाले समय शेयर बाजार संकेतक क्या है? में बाजार दोबारा तेजी की राह पर लौटेगा, जिससे इंडेक्‍स फंड में पैसे लगाने वालों को तगड़ा रिटर्न मिल सकता है.

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Share Market: विदेशी बाजारों का क्या हाल, कैसा रहेगा आज भारतीय शेयर मार्केट?

Stock To Watch: वन 97 कम्युनिकेशन, मैक्स फाइनेंशियल सर्विस, लुपिन, हिंदुस्तान यूनिलिवर, अडानी एंटरप्राइस.

Share Market: विदेशी बाजारों का क्या हाल, कैसा रहेगा आज भारतीय शेयर मार्केट?

टोक्यो में गिरावट और शंघाई के सपाट बंद होने से ज्यादातर एशियाई बाजार 8 दिसंबर को दबाव में रहे. हांगकांग में सख्त कोविड नीति में ढील देने के कारण बाजार गुलजार रहे.

भारतीय शेयर बाजार (Indian Share Market) एक दिन पहले मामूली बढ़त के साथ बंद हुए. बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) 160 अंक या 0.26% बढ़कर 62,570 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 50 (NSE Nifty 50) 48 अंक या 0.26% चढ़कर 18,609 पर बंद हुआ.

विदेशी बाजारों का क्या हाल?

प्रमुख अमेरिकी बाजारों ने कैसा किया प्रदर्शन-

S&P 500 0.75 फीसदी चढ़ा

NASDAQ में 1.1 फीसदी की बढ़ोतरी हुई

Dow Jones 0.55 फिसदी चढ़ा

एशियाई बाजार कर रहे अच्छा प्रदर्शन-

सिंगापुर स्‍टॉक एक्‍सचेंज सुबह 7 बजकर 40 मिनट पर 69 अंक या 0.37 फीसदी ऊपर है

जापान के निक्केई में 1.19 फीसदी चढ़ा

ताइवान का शेयर बाजार 0.80 फीसदी चढ़ा

साउथ कोरिया के कॉस्पी में 0.48 फीसदी चढ़ा

एनएसई पर उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 6 दिसंबर को, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने 1,132 करोड़ रुपये के शेयर्स बेचे, वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने भी 772 करोड़ रुपये के शेयर्स खरीदे हैं.

खबरों में हैं ये स्टॉक्स

आज शेयर बाजार में इन स्टॉक्स पर नजर रख सकते हैं जो खबरों में बने हुए हैं-

वन 97 कम्युनिकेशन (पेटीएम), मैक्स फाइनेंशियल सर्विस, लुपिन, हिंदुस्तान यूनिलिवर, सन फार्मास्युटिकल, अडानी एंटरप्राइस.

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Index Fund: क्या है इंडेक्स फंड, इसमें क्यों करें निवेश, कैसे मिलेगा बड़ा रिटर्न

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146 साल का हुआ बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज: कैसा रहा BSE का 1875 से लेकर अब तक का सफर?, जानिए सबकुछ

आज बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) 146 साल का गया है। 9 जुलाई 1875 में BSE की स्थापना हुई थी। यह एशिया का पहला और सबसे तेज स्टॉक एक्सचेंज है। करीब 41 साल पहले 100 के आधार अंक से शुरू हुआ बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स आज 53,000 के पार पहुंच गया है। यानी सेंसेक्स में लगभग 530 गुना की बढ़ोतरी हुई है।

शेयर मार्केट की शुरुआत एक बरगद के पेड़ के नीचे 318 लोगों ने 1 रुपये के एंट्री फीस के साथ की थी। 25 जनवरी, 2001 को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) ने डॉलेक्स-30 लॉन्च किया था। इसे BSE का डॉलर लिंक्ड वर्जन कहा जाता है।

सेंसेक्स की शुरुआत कहानी
1986 में जब सेंसेक्स की शुरुआत हुई तो इसका बेस इयर 1978-79 को रखा गया और बेस 100 पॉइंट बनाया गया। जुलाई 1990 में ये आंकड़ा 1,000 पॉइंट पर पहुंच गया। 1991 के आर्थिक उदारीकरण के बाद सरकार ने FDI के दरवाजे खोले और बिजनेस करने के कानून में बदलाव किया। मार्केट वैल्यू का डिरेगुलेशन किया गया और अर्थव्यवस्था को सर्विस ओरिएंटेड कर दिया। इसने सेंसेक्स में गति बढ़ाई।

जब सेंसेक्स पहली बार बना, तब क्या बदलाव हुए
सबसे पहले सर्विस इंडस्ट्री, यानी बैंकिंग, टेलीकॉम और आईटी सेक्टर्स की कंपनियों को शामिल किया गया। इसके बाद 90 के दशक के अंत और 2,000 की शुरुआत में आईटी कंपनियों में तेजी से हो रहे डेवलपमेंट को देखते हुए पुरानी कंपनियों की जगह टीसीएस और इंफोसिस को शामिल किया गया। उदारीकरण के बाद से ही भारत की बड़ी कंपनियां घरेलू बिक्री पर ज्यादा निर्भर नहीं हैं। ये सभी कंपनियां एक्सपोर्ट के जरिए बिजनेस बढ़ाती रही हैं। वहीं आईटी सेक्टर में आउटसोर्सिंग की वजह से इन्फोसिस जैसी कंपनियों को फायदा हुआ है। टाटा जैसी ऑटोमोबाइल सेक्टर की कंपनी ने यूके जैसे विकसित बाजारों में कदम रखा है

हर्षद मेहता कांड:मार्च 1992 में सेंसेक्स पहली बार 4 हजार के स्तर पर बंद हुआ, लेकिन इसके बाद सेंसेक्स 2,900 से 4,900 के बीच झूलता रहा और इसे 5 हजार तक पहुंचने में सात साल से ज्यादा लग गया। इसका मुख्य कारण था कि इसी साल हर्षद मेहता के घोटाले का खुलासा होने से शेयर बाजार में भारी बिकवाली हुई थी।

2006 में 10 हजार पार
सेंसेक्स को 5 हजार से 10 हजार तक पहुंचने में 6 साल से ज्यादा समय लग गया। 7 फरवरी 2006 को सेंसेक्स 10,082.28 पर बंद हुआ, लेकिन अगले डेढ़ साल में ही सेंसेक्स 10 से 15 हजार के स्तर पर पहुंच गया।

सेंसेक्स के लिए 2007 सबसे बेहतरीन
9 जुलाई 2007 को सेंसेक्स 15,045.73 पर बंद हुआ। 2007 सेंसेक्स के लिए अब तक सबसे बेहतरीन साल रहा। अगले छह महीने में ही सेंसेक्स 20 हजार के स्तर पर पहुंच गया और दिसंबर 2007 में सेंसेक्स ने 20,000 का स्तर भी पार कर लिया था।

2008 की मंदी ने बाजार का खेल बिगाड़ा
8 जनवरी 2008 को सेंसेक्स ने कारोबार के दौरान पहली बार 21 हजार का स्तर पार किया था, लेकिन इसी साल आई अंतरराष्ट्रीय मंदी ने पूरा खेल बिगाड़ दिया था। मंदी की वजह से पूरी दुनिया के शेयर बाजारों के साथ ही भारतीय शेयर बाजार भी धड़ाम हो गए और 10 जनवरी 2008 को सेंसेक्स 14,889.25 के स्तर पर बंद हुआ. इसी साल 16 जुलाई को सेंसेक्स 12,575.8 पर बंद हुआ। इतना ही नहीं नवंबर 2008 में सेंसेक्स 8,451.01 के स्तर तक पहुंच गया था। इसके बाद सेंसेक्स को फिर वापस 21 हजार के स्तर तक जाने में करीब 3 साल लगे थे।

2014 में बाजार ने नरेंद्र मोदी का शानदार स्वागत किया
साल 2013 में BSE सेंसेक्स ने पलटी मारी और 18 जनवरी 2013 को सेंसेक्स फिर 20,039.04 पर बंद हुआ। 2014 में केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनी। शेयर बाजार ने भी मोदी सरकार का जमकर स्वागत किया। 16 मई 2014 को ही सेंसेक्स 25,364 के स्तर तक पहुंच गया था। इसके बाद सेंसेक्स को 25 हजार से 30 हजार तक पहुंचने में तीन साल का समय लगा था।

साल 2017 में 30 हजार का स्तर
साल 2017 के अप्रैल महीने में सेंसेक्स 30,133 तक पहुंचा और अगले एक साल में ही सेंसेक्स 35 हजार के लेवल पर पहुंच गया। 17 जनवरी 2018 को सेंसेक्स 35,081 पर बंद हुआ। 30 अक्टूबर 2019 को सेंसेक्स ने 40,051 के स्तर को छू लिया था।

कोरोना संकट में बड़ा झटका लगा
सेंसेक्स जनवरी 2020 में 42 हजार के करीब पहुंच गया था, लेकिन इसके बाद साल 2020 का कोरोना ने तबाही मचाना शुरू कर दिया था। और यही कारण था कि सेंसेक्स मार्च 2020 में लॉकडाउन शेयर बाजार संकेतक क्या है? के बाद 25,981 तक पहुंच गया था, हालांकि अप्रैल के अंत और मई से सेंसेक्स में फिर से शानदार रिकवरी आने लगी।

15 महीने में 40 से 50 हजार का सफर
30 अक्टूबर 2019 को सेंसेक्स पहली बार 40,000 के पार बंद हुआ। विदेशी और घरेलू निवेशकों के दम पर सेंसेक्स ने करीब एक साल में ही 40 से 45 हजार तक का सफर तय कर लिया। 4 दिसंबर, 2020 को सेंसेक्स 45,079 पर बंद हुआ। इसके करीब डेढ़ महीने बाद ही सेंसेक्स ने 21 जनवरी 2021 को नया रिकॉर्ड बनाते हुए 50 हजार का आंकड़ा पार कर लिया।

किसने की थी बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज की शुरुआत?
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज की शुरुआत 4 गुजराती और एक पारसी शेयर ब्रोकर्स ने की थी। 1850 के आसपास अपने कारोबार के सिलसिले में मुंबई के टाउन हॉल के सामने बरगद के एक पेड़ के नीचे बैठक किया करते थे। इन ब्रोकर्स की संख्या साल-दर-साल लगातार बढ़ती गई। 1875 में इन्होंने अपना 'द नेटिव शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स एसोसिएशन’ बना लिया, साथ ही, दलाल स्ट्रीट पर एक ऑफिस भी खरीद लिया। आज इसे बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज कहा जाता है।

दैनिक भास्कर से खास बातचीत में BSE के MD & CEO आशीष चौहान ने कहा कि BSE अपनी स्थापना के बाद पिछले 146 सालों से भारत में इन्वेस्टमेंट और वेल्थ क्रिएशन के लिए काम कर रहा है। BSE की सफलता की कोशिश, 7.2 करोड़ से ज्यादा निवेशक खाते, 4,700 से ज्यादा रजिस्टर्ड कंपनियों और 231 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा के इक्विटी मार्केट कैपिटलाइजेशन से देखी जा सकती है। BSE आने वाले समय में भारत को डबल डिजिट एनुअल ग्रोथ हासिल करने में मदद करेगा।

Stock Market: शेयर बाजार आज फिर टूटा, सेंसेक्स 480 अंक से ज्यादा लुढ़का, निफ्टी 17000 के नीचे खुला

Stock Market Opened On Red Mark Today: सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स सूचकांक 483 अंक या 0.85 फीसदी की गिरावट के साथ 56,577 के स्तर पर खुला, जबकि एनएसई का निफ्टी सूचकांक ने 145 अंक या 0.85 फीसदी फिसलकर 17 हजार के नीचे 16,958 के स्तर पर कारोबार शुरू किया।

शेयर बाजार संकेतक क्या है? शेयर बाजार संकेतक क्या है? शेयर बाजार में गिरावट।

कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को शेयर बाजार की शुरुआत लाल निशान पर हुई। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स सूचकांक 483 अंक या 0.85 फीसदी की गिरावट के साथ 56,577 के स्तर पर खुला, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी सूचकांक ने 145 अंक या 0.85 फीसदी फिसलकर 17 हजार के नीचे 16,958 के स्तर पर कारोबार शुरू किया। कारोबार शुरू होने के कुछ ही देर बाद सेंसेक्स 631 अंक तक टूट गया।

बाजार खुलने के साथ लगभग 786 शेयरों में तेजी आई, 1425 शेयरों में गिरावट आई और 118 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ। इससे पहले बीते कारोबारी सप्ताह के आखिरी दिन शुक्रवार को बाजार बढ़त के साथ खुलकर अंत में लाल निशान पर बंद हुआ था। बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स सूचकांक 460 अंक या 0.80 फीसदी की गिरावट के साथ 57,061 के स्तर पर बंद हुआ था, जबकि एनएसई का निफ्टी सूचकांक 142 अंक या 0.83 फीसदी फिसलकर 17,102 के स्तर पर बंद हुआ था।

विस्तार

कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को शेयर बाजार की शुरुआत लाल निशान पर हुई। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स सूचकांक 483 अंक या 0.85 फीसदी की गिरावट के साथ 56,577 के स्तर पर खुला, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी सूचकांक ने 145 अंक या 0.85 फीसदी फिसलकर 17 हजार के नीचे 16,958 के स्तर पर कारोबार शुरू किया। कारोबार शुरू होने के कुछ ही देर बाद सेंसेक्स 631 अंक तक टूट गया।

बाजार खुलने के साथ लगभग 786 शेयरों में तेजी आई, 1425 शेयरों में गिरावट आई और 118 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ। इससे पहले बीते कारोबारी सप्ताह के आखिरी दिन शुक्रवार को बाजार बढ़त के साथ खुलकर अंत में लाल निशान पर बंद हुआ था। बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स सूचकांक 460 अंक या 0.80 फीसदी की गिरावट के साथ 57,061 के स्तर पर बंद हुआ था, जबकि एनएसई का निफ्टी सूचकांक 142 अंक या 0.83 फीसदी फिसलकर 17,102 के स्तर पर बंद हुआ था।

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