Update: Sunday, December 25, 2022 @ 2:01 PM

_______ का अध्ययन छात्रों के प्रयोग और विश्लेषण करने की क्षमता में सुधार करता है।

AWES Army Public School Results have been released on 22nd November 2022. The Army Welfare Education Society, known as AWES, had released AWES Army Public दुनिया में सबसे अच्छा तकनीकी विश्लेषक कौन है? School Recruitment Notification 2022. Through this recruitment process, teachers will be recruited for 136 Army Public Schools situated in various military and cantonment areas across India. The candidates can apply for the post online from 25th August 2022 to 5th October 2022. The exam is scheduled for 5th and 6th November 2022. The willing candidates should go through the AWES Army Public School Preparation Tips to have an edge over others in the exam.

तिरस्कार के डर से छात्र दे रहे जान : विशेषज्ञ

देश के सबसे प्रतिष्ठित महाविद्यालयों में प्रवेश पाने के सपने के साथ हर साल लाखों छात्र तैयारी (कोचिंग) के दुनिया में सबसे अच्छा तकनीकी विश्लेषक कौन है? लिए प्रसिद्ध राजस्थान के कोटा आते हैं।

तिरस्कार के डर से छात्र दे रहे जान : विशेषज्ञ

प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर।

लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार उनमें से कई जल्द ही खुद को व्यस्त दिनचर्या, साथियों के दबाव और उम्मीदों के बोझ से दबा पाते हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि यह परीक्षा में विफल होने का डर नहीं है, बल्कि इसके बाद का अपमान और तिरस्कार है जो उन्हें (छात्रों को) अपने जीवन को समाप्त करने की दिशा में ले जाता है।

यहां प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे तीन छात्रों द्वारा हाल में की गई खुदकुशी ने इस बात को लेकर नए सिरे से बहस छेड़ दी है कि आखिर किस वजह से छात्र इस दिशा में बढ़ जाते हैं। एलेन करिअर इंस्टीट्यूट के प्रमुख मनोवैज्ञानिक डा हरीश शर्मा ने यहां कहा कि छात्रों को अक्सर पढ़ाई के बजाय भावनात्मक तनाव से दुनिया में सबसे अच्छा तकनीकी विश्लेषक कौन है? जूझना मुश्किल लगता है। उन्होंने कहा, छात्रों के बीच शिक्षा संबंधी तनाव, भावनात्मक तनाव जितना अधिक नहीं है।

छात्र वास्तव में एक परीक्षा में विफल होने से नहीं डरते हैं, बल्कि इसके बाद के अपमान और तिरस्कार से डरते हैं। इसलिए वे पलायनवादी रुख अपनाना पसंद करते हैं। शर्मा ने कहा दुनिया में सबसे अच्छा तकनीकी विश्लेषक कौन है? कि दूसरों की उम्मीदों का बोझ उनकी खुद की उम्मीदों के साथ जुड़ जाता है, जो अक्सर छात्रों को हतोत्साहित करता है।

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उन्होंने कहा, ‘‘पालन-पोषण की शैली वैसी ही है, जैसी 1970 के दशक में थी, जबकि बच्चे के पास 2022 का आधुनिक मस्तिष्क है और उसे जो कुछ भी करने के लिए कहा जाता है, वह उसके लिए वैज्ञानिक स्पष्टीकरण की मांग करता है। कई बार, माता-पिता अपने बच्चे से कुछ ऐसा करवाते हैं, जो वे नहीं करना चाहते। दूसरों के साथ खुद की अपेक्षाओं का बोझ बच्चों को हतोत्साहित करता है।’’ एक के बाद एक व्याख्यान, परीक्षा श्रृंखला, अपने साथियों से आगे निकलने की निरंतर दौड़ और पाठ्यक्रम के साथ तालमेल बिठाने की कोशिश – कोटा में कोचिंग सेंटर में पढ़ने वाले छात्र का औसत दिन लगभग ऐसा ही दिखता है।

शर्मा ने कहा कि इस व्यस्त कार्यक्रम के बीच, कई छात्र खुद को थोड़ी राहत देने के लिए वेब सीरीज देखते हैं, लेकिन अक्सर यह नहीं जानते कि कब रुकना है, जिससे वे अपनी पढ़ाई में पीछे रह जाते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘वेब सीरीज की लत गंभीर है। उनका प्रभाव डोपामाइन (फील-गुड हार्मोन) के एक शाट से दुनिया में सबसे अच्छा तकनीकी विश्लेषक कौन है? 4,000 गुना अधिक है। छात्र तब तक वेब सीरीज देखना बंद नहीं करते, जब तक कि वे इसे पूरा नहीं कर लेते।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम अक्सर छात्रों को सूजन और लाल आंखों के साथ इलेक्ट्रानिक स्क्रीन सिंड्रोम से पीड़ित पाते हैं।’’

यहां न्यू मेडिकल कालेज अस्पताल के मनोचिकित्सा विभाग के प्रमुख डा चंद्रशेखर सुशील ने कहा कि माता-पिता को अपने बच्चों को डाक्टर और इंजीनियर बनाने के लिए दबाव बनाने के बजाय अपने बच्चों का अभिवृत्ति (एप्टीट्यूड) टेस्ट कराना चाहिए और फिर तय करना चाहिए कि उनके लिए सबसे अच्छा क्या है।जिला प्रशासन ने अब कोचिंग संस्थानों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि वे एक मनोवैज्ञानिक को नियुक्त करें और जेईई और एनईईटी (मेडिकल) के अलावा अन्य करिअर विकल्पों पर भी छात्रों का मार्गदर्शन करें।

इस साल यहां कोचिंग सेंटरों में पढ़ने वाले 14 छात्रों ने आत्महत्या की है। पुलिस के मुताबिक, पिछले सप्ताह आत्महत्या करने वाले तीन छात्रों में से बिहार के नीट परीक्षार्थी अंकुश आनंद (18) और बिहार के गया जिले के जेईई की तैयारी कर रहे उज्ज्वल कुमार (17) अपने पेइंग गेस्ट (पीजी) आवास में अपने-अपने कमरे में 12 दिसंबर को फंदे से लटकते पाए गए। तीसरे छात्र मध्य प्रदेश से आए नीट की तैयारी कर रहे प्रणव वर्मा (17) ने 11 दिसंबर को अपने छात्रावास में कथित तौर पर जहरीले पदार्थ का सेवन किया था।

हालांकि, 2021 में किसी भी छात्र की आत्महत्या की सूचना नहीं मिली, जब यहां के कोचिंग सेंटर कोविड-19 महामारी के कारण बंद थे और छात्रों ने अपने घरों से आनलाइन कक्षाओं में भाग दुनिया में सबसे अच्छा तकनीकी विश्लेषक कौन है? लिया। कोचिंग सेंटर के छात्रों द्वारा आत्महत्या की संख्या 2019 में 18 और 2020 में 20 थी। इस साल कोटा के विभिन्न कोचिंग संस्थानों में सर्वाधिक दो लाख छात्र पढ़ रहे हैं।

IPL 2023: 'पंजाब की टीम ने इस खिलाड़ी के साथ ठीक नहीं किया', क्रिस गेल ने किया बड़ा खुलासा

IPL 2023 Auction: कोच्चि में शुक्रवार, 23 दिसंबर को आईपीएल (IPL) के अगले सीजन से पहले मिनी ऑक्शन होना है।

PC: iplt20.com/BCCI

IPL 2023 Auction: कोच्चि में शुक्रवार, 23 दिसंबर को आईपीएल (IPL) के अगले सीजन से पहले मिनी ऑक्शन होना है। मेगा इवेंट के लिए कुल 405 खिलाड़ियों को शॉर्टलिस्ट किया गया है, जिनमें 273 भारतीय और 132 विदेशी क्रिकेटर शामिल हैं। दुनिया के कई स्टार प्लेयर्स की किस्मत कल ऑक्शन में तय होंगी, वहीं मयंक अग्रवाल, मनीष पांडे जैसे कुछ भारतीय खिलाड़ी भी इस लिस्ट में हैं जिनपर 10 टीमों के मालिकों की नजर टिकी होगी।

खेल के कुछ सबसे बड़े सुपरस्टार आईपीएल 2023 की नीलामी के लिए एक विशेषज्ञ पैनल का हिस्सा हैं, जिसमें क्रिस गेल, सुरेश रैना, एबी डिविलियर्स और इयोन मोर्गन जैसे खिलाड़ी शामिल हैं। टीम इंडिया के पूर्व मुख्य कोच अनिल कुंबले भी उस पैनल का हिस्सा हैं जो JioCinema पर नीलामी कवरेज का विश्लेषण करेगा।

इस बीच टी20 के सर्वकालिक महान खिलाड़ियों में से एक क्रिस गेल अपनी पूर्व टीम पंजाब किंग्स के पिछले साल के कप्तान मयंक अग्रवाल को ‘रिलीज’ किये जाने के तरीके से काफी निराश थे और उन्होंने कहा कि फ्रेंचाइजी में हास्यास्पद स्तर तक ‘बाहर करके बदलाव’ करने की प्रवृति है। मयंक ने इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के बीच में शीर्ष बल्लेबाजी क्रम में जॉनी बेयरस्टो को शामिल करने के लिये अपने सलामी बल्लेबाज स्थान का त्याग कर दिया और अब आईपीएल की नीलामी से पहले पंजाब किंग्स ने उन्हें रिलीज कर दिया। मयंक टीम के लिये लगातार अच्छा प्रदर्शन करते रहे हैं, वह पिछले सत्र में उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सके और 13 मैचों में 196 रन ही बना सके थे। पंजाब की टीम लगातार चौथे सत्र में छठे स्थान पर रही। अभी तक टीम आईपीएल का खिताब नहीं जीत सकी है जबकि 2014 में वह एक बार फाइनल में भी पहुंची थी।

🔥 in our Auction War Room as the 🇦🇺 gets picked up for 20 crores.

गेल ने पीटीआई से कहा कि फ्रेंचाइजी ने मयंक के साथ सही व्यवहार नहीं किया और उन्हें उम्मीद है कि शुक्रवार को होने वाली नीलामी में इस बल्लेबाज को अच्छी राशि में खरीदा जायेगा। गेल ने आईपीएल नीलामी से पहले ‘जियो सिनेमा’ द्वारा आयोजित करायी गयी इस बातचीत में कहा, ‘‘मयंक को निश्चित रूप से खरीदा जायेगा। अगर ऐसा नहीं होता है तो मुझे बहुत निराशा होगी। क्योंकि वह इतना आक्रामक खिलाड़ी है। ’’

उन्होंने कहा, ‘‘वह पंजाब द्वारा रिटेन नहीं कराये जाने से खुद अंदर से काफी हताश होगा क्योंकि उसने फ्रेंचाइजी के लिये काफी त्याग किया था और अब उससे इस तरह का व्यवहार करना निराशाजनक है लेकिन मुझे उम्मीद है कि टीमें अब भी भरोसा करती हैं और उसे अच्छी राशि मिलेगी। वह बेहतरीन ‘टीम मैन’ भी है। ’’

इन चीजों का भूलकर भी ना करें रात को सेवन, वरना पेट हो जाएगा खराब

रेड मीट, दही, तली-भुनी चीजें अक्सर पाचन तंत्र को करती हैं प्रभावित

इन चीजों का भूलकर भी ना करें रात को सेवन, वरना पेट हो जाएगा खराब

Update: Sunday, December 25, 2022 @ 2:01 PM

शरीर को अगर निरोग और फिट रखना (keeping the body healthy and fit) हो तो हमें कई प्रकार ध्यान रखना पड़ता है। हमें ख्याल रखना होता है कि कौन सी चीज दिन में खानी है और कौन सी रात को खानी है। कौन सी चीजें रात को खाने से शरीर को नुकसान पहुंचता है। यह तभी हो सकता है जब आपको इसके बारे में पूरा पता हो। तो आइए आज आपको बताते हैं कि ऐसी कौन सी चीजें हैं, जिन्हें रात को खाने से नुकसान (Loss) होता है। सबसे पहले प्रोसेस्ड फूड्स और स्नैक्स को खाने से परहेज करें। जैसा कि कई लोगों को दुनिया में सबसे अच्छा तकनीकी विश्लेषक कौन है? रात को सोने से पहले कोई स्नैक्स, नमकीन (Snacks) या प्रोसेस्ड स्वीट खाना अच्छा लगता है। ऐसी चीजों में कई तत्व मिलाए जाते हैं। ये तत्व रात को रिएक्शन करते हैं और बदहजमी जैसी समस्या पैदा हो जाती है। यदि इस आदत को समय रहते बदला ना जाए तो भविष्य में पेट से संबंधित तकलीफें बढ़ जाएंगी। इसी प्रकार रात को तले-भुने या चिकनाई वाली चीजों से भी परहेज ही करना चाहिए।

fruits

इनका सेवन करने से पाचनतंत्र (Digestive System) को इन्हें पचाने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ती है। ऐसा करने से पेट में टॉक्सिंस बनने लगते हैं और इससे गैस, अफारा, या उल्टी-दस्त की समस्या पैदा हो सकती है। अतः जहां तक हो सके तो ऐसा करने से परहेज ही करना चाहिए। वैसे तो ताजे मौसमी फलों के सेवन को शरीर के लिए बढिया माना जाता है, मगर रात को इसका सेवन जहर के समान है। होता यह है कि फलों की तासीर ठंडी होती है। अतः रात को इसका सेवन करने से खांसी-जुकाम, बुखार और शरीर में दर्द की परेशानी हो सकती है। साथ एलर्जी भी कम हो सकती है।

red-meat

इसके अतिरिक्त मांस के शौकीन सर्दियों के दिनों में (in the winter) अकसर रात में रेड मीट खाना बहुत ही पसंद करते हैं। ऐसा करने से शरीर को ऊर्जा और गर्मी मिलती है। मगर इसके कुछ साइड इफेक्ट्स भी हैं। क्योंकि यह पचने के लिए काफी समय लेता है और सोने के लिए पेट रिएक्शन (reaction) करने लगता है। इसलिए ही आयुर्वेदिक विशेषज्ञ अकसर रात को रेड मीट का सेवन करने से परहेज करते हैं। वहीं माना जाता है कि दही का सेवन शरीर के लिए बहुत अच्छा होता है।

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आयुर्वेद में कहा गया है कि रात को दही का सेवन नहीं करना चाहिए। डॉक्टरों के अनुसार दही एक भारी पदार्थ होता है और इसे पचाने के लिए काफी देर लग जाती है। वहीं दही की ठंडी तासीर होती है और सीने में जकड़न और नजले की समस्या बढ़ जाती है। वहीं आयुर्वेद में कहा गया है कि यदि आप अपने पेट को निरोग रखना चाहते हैं तो भोजन की टाइमिंग पर ध्यान देना बहुत ही जरूरी होता है। अतः रात को सोने से तीन घंटे पहले ही भोजन कर लेना चाहिए। इससे भोजन को पचाने के लिए पाचन तंत्र को पूरा समय मिल जाएगा। यदि आप ऐसा रूटीन में करते हैं तो आपको पेट दर्द, गैस, अफारा, कब्ज-दस्त से मुक्ति मिल जाएगी।

Farm machinery: फसल की कटाई के ल‍िए करें र‍िपर का इस्तेमाल, बचेगा समय-बढ़ेगा मुनाफा

फसलों की कटाई किसानों के लिए सबसे चुनौती होती है. ऐसे में अगर कृषि यंत्र का सहयोग मिल जाए तो किसानों का काम हल्का हो जाता है और समय की भी बचत होती है. ऐसे में कौन सा कृषि यंत्र जरूरी है आज हम इसपर चर्चा करने:

कृषि यंत्र

कृषि यंत्र

  • Noida,
  • Dec 26, 2022,
  • Updated Dec 26, 2022, 3:13 PM IST

इस वक़्त रबी का मौसम चल रहा है. रबी की फसल को सर्दी की फसल भी कहा जाता है. इस मौसम में किसान गेंहू, जौ, जई, तोरिया (लाही), राई/सरसों, पीली सरसों, अलसी, कुसुम, रबी मक्का, शिशु मक्का (बेबी कॉर्न), चना, मटर, मसूर, रबी राजमा, बरसीम, मशरूम, आलू आदि फसलों की खेती कर मुनाफा कमाते हैं. बुवाई का लगभग काम पूरा हो चुका है और अब किसान फसल की कटाई कर मंडी में बेचने की तैयारी कर दुनिया में सबसे अच्छा तकनीकी विश्लेषक कौन है? रहे हैं.

फसल जब तक तैयार होकर मंडी में ना पहुंच जाए तब तक किसानों के मन में डर बना रहता है. लेकिन मंडी तक दुनिया में सबसे अच्छा तकनीकी विश्लेषक कौन है? जाने से फसल को कई पड़ाव से गुजरना पड़ता है. अगर गेहूं की बात करें तो मार्च के महीने तक गेहूं कटाई के लिए तैयार हो जाता है. जहां एक तरफ फसल के बिकने की खुशी किसानों को रहती है, तो वहीं फसलों के कटाई की चिंता भी सताती है.

ऐसे में किसानों के इस चिंता को खत्म करने के लिए कृषि यंत्र बहुत ही लाभकारी है. कटाई के लिए किसानों को कृषि यंत्र (Agri-Machine) की जरुरत होती है. कृषि यंत्र के महत्व और किसानों की जरूरतों को समझते हुए अब सरकार भी कृषि यंत्र पर किसानों को सब्सिडि दे रही है. ऐसे में कौन-कौन से जरूरी कृषि उपकरण हैं आज हम उसपर बात करेंगे:

कटाई के लिए उपयुक्त है कृषि यंत्र र‍िपर

आज इस कड़ी में हम बात करेंगे गेहूं की कटाई के लिए कौन सा कृषि यंत्र सबसे उपयुक्त है. गेहूं की कटाई के लिए रिपर कृषि यंत्र अब तक सबसे सही माना जा रहा है. रिपर बहुत हल्का होता है. इसके वजन की अगर बात करें, तो इसका कुल वजन 8-10 किलोग्राम तक होता है. कुछ आंकड़ों के अनुसार, गेहूं की कटाई में हसिया की तुलना में रीपर मशीन से चार गुना ज्यादा फायदेमंद है और कम मजदूरी भी लगती है. तेल की खपत भी बहुत कम है. प्रति घंटे मात्र 1 लीटर तेल की खपत होती है. इस फसल कटने वाले मशीन को हार्वेस्टर भी कहा जाता है.

यह मशीन गेहूं, धान, धनिया और ज्वार आदि की कटाई में अच्छा काम करती है. जिससे किसानों की लागत भी कम लगती है और मुनाफा भी अच्छा होता है. यदि आप इस कृषि यंत्र का ब्लेड बदल दें, तो आप आसानी से मकई भी काट सकते है. बाजार में कई तरह की मशीनें हैं, जिनकी कीमत किसानों के लिए उपयुक्त मानी जाती हैं. ऐसे उपकरण ऑनलाइन भी उपलब्ध हैं और कीमतें 15 से 40 हजार तक हो सकती हैं. अगर आपके पास निवेश करने के लिए इतनी धन राशि नहीं है, तो आप मशीन किराए पर भी ले सकते हैं.

इन मशीनों की एक प्रमुख विशेषता यह है कि छोटे या बड़े किसान अपनी फसल खुद काट सकते हैं और अपना किराया खुद चुका सकते हैं. इनमें से अधिकांश मशीन में तेल की खपत बहुत कम होती है.

छोटा मगर और दमदार कृषि यंत्र

चना हो या सोयाबीन, बड़े फसलों की कटाई से लेकर छोटी फसलों की कटाई तक में किसानों की मुश्किलें काफी बढ़ जाती हैं. इसको आसान बनाने के लिए, बाजार में कई कटाई मशीनें हैं, जिन्हें किसान आजमा सकते हैं. इन फसलों को काटने के लिए छोटू मशीन के तौर पर रिपर मशीन बाजार में आ गया है.

इससे गेहूं के साथ-साथ बरसीम, चना या सोयाबीन को आसानी से काटा जा सकता है. छोटू हार्वेस्टर से 1 फुट तक के पौधे भी आसानी से काटे जाते हैं. यह 50cc 4-स्ट्रोक इंजन द्वारा संचालित किया जाता है. किसान भाई इस मशीन की किराए पर आसानी से ले सकते हैं.

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